How Potato get his name "Aloo"

 आलू का नाम आलू कैसे पड़ा?

किसी भी खाने योग्य लगभग गोलाकार जड़ को संस्कृत भाषा में आलु कहते हैं। यह एक भारोपीय मूल का शब्द है जिसका परिकल्पित भारोपीय मूल शब्द *h₂eHlu है। लैटिन भाषा का alium (अल्लम — लहसुन अथवा प्याज) इसका बन्धु शब्द है। ग्रीक भाषा का ἄλλην (आल्लेन — शाक) भी इससे सम्बन्धित शब्द है।

कैरेबियन द्वीपों की तैनो जनजातियों ने शकरकन्द को बटाटा नाम दिया। वहीं से स्पेनी तथा पुर्तगाली व्यापारियों ने यह शब्द सीखा और इसे नई दुनिया के महाद्वीपों की भूमि से उपजे कन्द-मूलों को भी बटाटा नाम दिया। जिसे अंग्रेजों ने पोटैटो कर दिया। किन्तु यह शब्द बोलीविया और पेरू में लगभग दस हजार वर्ष पूर्व कृषि आरम्भ किए आलुओं के लिए मुख्य रूप से प्रयोग किया जाने लगा।

(कैरोलस क्लुसियस (Carolus Clusius’s) का शकरकन्द का बटाटा के रूप में चित्रण — सन् १६०१ — मूल स्रोत — Rariorum plantarum historia, Antwerp, Officina Plantiniana, 1601, चित्र स्रोत: A Cultural History of the Potato as Earth Apple )

यूरोपीय लोगों के अमेरिकी महाद्वीपों तक पहुँचने से पूर्व ही आलू लगभग सम्पूर्ण अमेरिकी महाद्वीपों में उपजाया जाने लगा था।

(कैरोलस क्लुसियस का उसी पुस्तक में आलू का चित्रण, यह डच भाषा में ‘earth apple’ (‘erdaphul’, ‘eorðæpla’, ‘erdappel’) भूमि का सेबफल कहा गया, चित्र स्रोत: A Cultural History of the Potato as Earth Apple )

अमेरिकी महाद्वीपों से पुर्तगाली व्यापारी पोटैटो लेकर भारत में आए, तथा यह भारत में भी बटाटा के नाम से बहुत प्रसिद्ध हुआ। कोंकण तट पर पुर्तगालियों का व्यापार बहुत फैला। इसी तट पर एक प्रकार का आलु जिसे कचालु (संस्कृत कासालु) बहुत प्रसिद्ध था। इसी कारण बटाटा भी एक प्रकार के आलु के रूप में विख्यात हो गया।

आलू शब्द की व्याख्या करते हुए राजनिघण्टु में कहा गया है किकन्दो बहुविधो लोकेआलुशब्देन भण्यते । कच्चालु चैव घण्टालु पिण्डालु शर्करादिकम् काष्ठालु चैवमाद्यं स्यात् तस्य भेदा अनेकशः

अनेक प्रकार के कन्द (भूमिगत शाकों) के लिए आलु शब्द का प्रयोग करते हैं, यथा, कचालु, घण्टालु, पिण्डालु, शर्करालु, काष्ठालु आदि इनके अनेक भेदों में हैं।

आलु को संस्कृत में आलुक भी कहा गया है। और आलुक के लिए भी वीरसेन ने काष्ठालुक (काठ से युक्त — कठालु), श्वेत रंग के शंख के आकार के शङ्खालु (शांखआलु), बड़े आकार के हस्त्यालुकं (चुवड़ीआलु), गोल आकार के पिण्डालु (सुथ्नी), मीठे स्वाद के मध्वालुकं, शर्करालुकं (शकरकन्द), लाल रंग के रक्तालुकं (रतालु), आदि।

आलुकमप्यालूकं तत् कथितं वीरसेनश्च । काष्ठालुकशङ्खालुकहस्त्यालुकानिकथ्यन्ते । पिण्डालुकमध्वालुकरक्तालुकानिकथितानि” तत्र काष्ठालुकं काठिन्ययुक्तं (कठारु) शङ्खालुकं श्वेततायुक्तं शङ्खाकारम् (शांखआलु) हस्त्यालुकं दीर्घतायुक्तं महाशरीरम् (चुवड़ीआलु) पिण्डालुकं वर्त्तुलाकारं (सुथ्नी) मध्वालुकं माधुर्य्ययुतं दीर्घमुखं शर्करालु (शकरन्द) रक्तालुकं रक्ततायुक्तं (रतालु) तेषां गुणास्तत्रोक्ताः “

इसके अतिरिक्त पानीयालु, क्षुपालु, अनुपालु, रोमालु, असितालु, नीलालु, पत्रालु, पुटालु (कोलकन्द), शुभ्रालु (महीषकन्द), श्वेतालु, कृष्णालु, मेषालु, आदि नाम भी संस्कृत के विभिन्न ग्रंथों में मिलते हैं।

आलु शब्द सम्भवतः सबसे पहले हस्त्यालुकं (सुरण अथवा जमीकन्द —elephant foot yam) के लिए प्रयोग किया गया। फिर उससे यह शब्द अन्य प्रकार के कन्दों के लिए प्रयोग होने लगा। इस प्रजाति को पहले आरुम (Arum) परिवार कहा जाता था। आरुम परिवार के पादपों की जड़ें पोषक तत्वों का संग्रहण करती हैं। अब इसे अरासेइ (Araceae) परिवार कहा जाता है। र तथा ल का हेरफेर भाषागत परिवर्तन में सामान्य है, और इस परिवार के पादप पूर्वी एशियाई देशों से पश्चिमी यूरोप तक पाए जाते हैं।

अतः बहुत सम्भावना है कि आलुओं को यह नाम कोंकण तट पर पुर्तगाली व्यापारियों ने दिया, अथवा वहाँ बसे भारतीय उपभोक्ताओं ने इन्हें यह नाम दिया। जैसा कि बटाटा अथवा पोटैटो शब्द के साथ हुआ आलू शब्द पर भी इस महान वनस्पति ने एकाधिकार कर लिया।

विशेष टिप्पणी :—

ज्ञात रहे कि फ़ारसी भाषा आलू शब्द का प्रयोग (प्लम plum जैसे) गोलाकार फलों के लिए होता है। जैसे :—

ख़ोर्मालू — خرمالو — पर्सीमोन (persimmon — काकी)

शफ़तालू — شفتالو — पीच (peach) / नैक्टराइन (nectarine), इसे होलू (هلو) भी कहा जाता है।

ज़र्दालू — زردآلو — एप्रिकॉट (apricot)

आलू बुख़ारा — آلوی بخارا — प्लम (plum)

इस शब्द का संस्कृत आलु से सम्भवतः कोई सम्बन्ध नहीं है। इसके लिए आलू के लिए प्रयोग होने वाला फ़ारसी शब्द भी जान लेना आवश्यक है।

आलू को फ़ारसी भाषा में सीब-ज़मीन (سیب زمینی) भूमि का सेबफल कहते हैं। यह डच aardappel (आर्ड-आपल), अफ्रीकांस aartappel (आर्त-आपल), फ्रेंच pomme de terre (पॉम द तेरे), हिब्रू תפוח אדמה (तपुआच आदमा) तथा पुरानी अंग्रेजी भाषा में भी eorþæppla (एऑर्थऍप्पला) धरती के सेबफल के रूप में ही नामकरण किया गया है।

२ आलु शब्द के संस्कृत में अनेक अर्थ हैं।

१ नाव(आलु, क्ली, (आङ् + लु + डु ।) भेलकः । )

२ पौधों को पानी देने का झाला

आलुः, स्त्री, (आलाति । आङ् + ला + डु ।) स्वल्पवारिधानिका । घटी झारीइत्यादि भाषा । तत्पर्य्यायः । कर्करी २ गलन्तिका ३ । इत्यमरः ॥

३ उल्लू (पेचकः) — अंग्रेजी भाषा में owl (ऑउल)

आलुः, पुं, पेचकः । इति शब्दरत्नावली ॥

४ कचालू

आलुः, पुं, कासालुः । इति राजनिर्घण्टः ॥

५ आबनूस की लकड़ी


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