भविष्यपुराण में अरबीधर्म


*भविष्यपुराण में अरबीधर्म*


भविष्यपुराण में वर्णन है राजा भोज नाम के एक भारतीय राजा ने अरब में जाकर पंचगव्य से भगवान शिव का पूजन करके उन परमेश्वर की स्तुति करते हुए, उनसे प्रार्थनास्वरूप कहते है .....





नमस्ते गिरिजानाथ मरुस्थलनिवासिने।

त्रिपुरासुरनाशाय बहुमायाप्रवत्तने।।

म्लेच्छैर्गुप्ताय शुद्धाय सच्चिदानन्दरूपिणे । 

त्वं मां हि किङ्करं विद्धि शरणार्थमुपागतम् ॥


मरुभूमि के निवासी गिरिजापति को नमस्कार है, जिन्होंने अत्यंत माया के प्रवर्तक त्रिपुरासुर का नाश किया है, मल्लेछो द्वारा रक्षित तथा शुद्ध आनंदस्वरूप है , मैं आपका सेवक हूँ, और आपकी शरण मे उपस्तिथ हूँ ।


राजा भोज की स्तुति से प्रसन्न होकर महादेव जी ने कहा ... " राजा भोज :- महाबलि दैत्य से प्रेरित त्रिपुरासुर पुनः आ गया है " ।। इसके आगे भी बहुत सी बातें कहीं, जिन्हें सार्वजनिक पटल पर लिखना शायद उचित नही है .....


इन राजा भोज के कुल में आगे और 7 राजा हुए, किंतु भाग्यहीन होने के कारण यह वंश मात्र 300 वर्षो में ही समाप्त हो गया । भविष्यपुराण के अनुसार राजा भोज के लगभग 500 वर्ष बाद कन्नोज के जयचन्द्र का जन्म हुआ ।।

Facts of Bhavishya Purana

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